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मंडला के घाट
मैकल की पहाड़ियों से निकलकर बहती माँ नर्मदा के तट पर बसा है मंडला—चौबीस घाटों का एक पावन कुनबा। इस जीवंत कथा में स्वयं 'रपटा घाट' सूत्रधार बनकर अतीत और वर्तमान के ताने-बाने को बुनता है। वह देखता है बैगा समुदाय के महतो को, घटते जंगलों को, और बदलते बाज़ारों को। महात्मा गांधी के नारों की गूँज से लेकर राजाओं के खंडहर होते किलों, सिमटती परंपराओं और आधुनिकता की होड़ तक—नदी के शांत जल में इतिहास, स्मृतियाँ और मानवीय पीड़ा सब एक साथ बहती हैं।
Sep 295 min read
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